हलचल
उच्च शिक्षा का हाल- बेहाल – डॉ योगेन्द्र
केंद्र सरकार को सपना आया कि अगर राजभवन को लोकभवन कर दिया जाये तो क्रांति हो जायेगी।लोकभवन सत्य पर सवार हो जायेगा और सभी...
विचार
सावित्रीबाई फुले को दो काव्य संग्रह!
ब्राह्मणवाद-सामंतवाद के खिलाफ विद्रोह और आधुनिक संवेदना-चेतना की सृजनात्मक अभिव्यक्तियां
जन्मदिन (3 जनवरी) पर सादर नमन के साथ
अतीत के इन ब्राह्मणों के धर्मग्रंथ फेंक दो
करो...
राष्ट्र प्रेरणा स्थल और हमारा राष्ट्रीय चरित्र – अरुण कुमार त्रिपाठी
लखनऊ के लोगों ने उद्घाटन के दिन ही राष्ट्र प्रेरणा स्थल से 7000 गमले चुरा कर यह साबित कर दिया कि राष्ट्रीय चरित्र न...
वीडियो
विश्वगुरु बनने के नुस्खे – डॉ योगेन्द्र
विश्वगुरु बनने के लिए पहला अनिवार्य काम यह है कि बलात्कारियों की जाति की पहचान करो। अगर आपकी जाति के बलात्कारी हैं तो उनके...
अन्य स्तम्भ
जब एक ईसाई लड़की गांधीजी के आश्रम से एक बेहतर इंसान...
यह प्रसंग केवल महात्मा गांधी की उदारता का नहीं, बल्कि उनके गहरे धर्म-बोध, नैतिक साहस और वैश्विक मानवीय दृष्टि का जीवंत प्रमाण है। यह...
संवाद
संंघ पर जेपी की राय
आज जेपी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है। १९७४ के आंदोलन में उन्होंने सभी कांग्रेस विरोधी दलों को संपूर्ण क्रांति के लिए अपने...
अन्य लेख पढ़ें
सोशलिस्ट घोषणापत्र : तीसरी किस्त
(दिल्ली में हर साल 1 जनवरी को कुछ समाजवादी बुद्धिजीवी और ऐक्टिविस्ट मिलन कार्यक्रम आयोजित करते हैं जिसमें देश के मौजूदा हालात पर चर्चा...
सरकारी सम्मान लेने से पहले, माननी होगी नहीं लौटाने की शर्त, इस बारे में...
7 अगस्त। खबर है कि केन्द्र सरकार एक ऐसा कानून लाने जा रही है कि कोई भी सरकारी सम्मान पाने से पहले, इस शर्त...
राजघाट का माहात्म्य
— अरविन्द मोहन —
पंडित जवाहरलाल नेहरू के लिए गांधी की हत्या कैसा सदमा थी यह बताने की जरूरत नहीँ है। और वे ज्यादा कुछ...
ADIVASI AGITATION FOR IMPLEMENTATION OF CONSTITUTION
Amit Shah has vowed to end armed and violent naxalism by March 31 2026. Ue might well do so. Killing is easy because implementation...
साप्ताहिकी
सावित्रीबाई फुले जयंती के विशेष अवसर पर कविता
सावित्रीबाई फुले
एक युग था
जब अक्षर थे अपराध,
तब बनीं सावित्री
ज्ञान की स्पष्ट आवाज़,
भूमि पुस्तिका,
वृक्ष की डाल प्रथम कलम बनी,
जब वह पढ़ना सीख गईं,
जब वह लिखना...
धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव की कविता!
खुशियों से भर दे
भूखे को रोटी दे,
बेघर को घर दे।
माँ दुर्गे ! नया वर्ष
खुशियों से भर दे।
गीतों को, छंदों को,
नतमस्तक वन्दों को,
नन्हे परिंदों को,
एक...



























































































